गुरुवार, 10 मार्च 2016

पूनम सिंह की कविता

तुम्हारे बिना अधूरी है दुनिया
लाती तुम्ही हो जीवन में खुशियाँ
इस विश्वरूपी जलाशय में 
कमल दल के जैसी खिलती हो। 
तितली के पंखों सी कोमल
नदिया के जैसी बहती हो।
घरकी बुलबुल
माँ की आँखो की ठंडक
पिता का अभिमानतुम
सम्मान सबका करती हो ।
बनकर अर्धांगिनी
पति का साथ देती हो।
बनकर तुम वज्र सी
कठिनाइयों को सहती हो।
सावित्री बनकर तुम
यम से भी लड़ती हो ।
सींचती हो रक्त से
अपनी संतान को
पोसती आँचल में
भरकर पियूष ।
ममता से भरे नयनों
में तुम्हारे
लहराता है स्नेह
का सागर
कभी बनकर दुर्गा
असुरों को जीत लेती हो ।
पुत्री हो पत्नी हो या माँ
संसार में तुम्हारी 
नही कोई तुलना
लाती तुम्ही हो
जीवन में खुशियाँ ।
तुम्हारे बिना अधूरी
है दुनिया ।


पूनम सिंह सुलतानपुर उत्तर प्रदेश 
चित्र गूगल से साभार 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें