काव्य-शिल्पी

साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

कब लौटोगे राम?

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क्या रावण वध शेष अभी है कब लौटोगे राम? देख   रहा   है  राह  तुम्हारी विकल अयोध्या धाम  महल नहीं खँडहर बाकी हैं अब भी कातर स्वर बाकी हैं बाद ...
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अवनीश त्रिपाठी
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