काव्य-शिल्पी

साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊

sunil tripathi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
sunil tripathi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, 8 अगस्त 2016

सुनील त्रिपाठी की रचनाएं

›
               गीतिका      आधार छंद -वाचिक स्रिग्वणी वाचिक मापनी- २१२ २१२ २१२ २१२ 🌲🌹🌲🌹...
गुरुवार, 4 अगस्त 2016

सुनील त्रिपाठी की ग़ज़ल

›
【 काव्य शिल्पी, फिलबदी-7 】 🍁🍁 घुप अँधेरे से'तो  गुजर जाऊँ। देख कर रौशनी न डर जाऊँ । 🌹&#12817...
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

अवनीश त्रिपाठी
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.