काव्य-शिल्पी
साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊
masoom ghaziyabaadi पाले पोसे गए एक आँगन में हम
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मंगलवार, 21 जून 2016
ज़नाब मासूम ग़ाज़ियाबादी की उम्दा ग़ज़ल
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🌺🍂 पाले-पोसे गए एक आंगन में हम आज लगता है रस्मन अलग हो गए। बोली हिन्दी से उर्दू ए आपा मेरी कैसे मज़बूत बन्धन अलग हो...
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