काव्य-शिल्पी

साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊

बुधवार, 28 दिसंबर 2016

पारसनाथ श्रीवास्तव के दो उत्कृष्ट गीत

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आज पीर भी हुई पराई ----------------------- मन पीड़ा से तड़प रहा है देख स्वयं की तन्हाई ! देख मुझे ये विस्मय होता नियति नटी की निठुराई !...
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अवनीश त्रिपाठी
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