काव्य-शिल्पी

साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊

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मंगलवार, 29 जून 2021

कथ्य और शिल्प की दृष्टि से सशक्त और विशुद्ध दोहा संग्रह:सिसक रहा उपसर्ग by प्रभु त्रिवेदी

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श्वेतवर्णा प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित दोहा संग्रह ‘सिसक रहा उपसर्ग’ श्री अवनीश त्रिपाठी का प्रथम दोहा संग्रह है। यद्यपि इससे...
मंगलवार, 22 जून 2021

दोहे by अवनीश त्रिपाठी

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सच्चाई को घेरते, झूठों के प्रतिरूप। लगता जैसे पलटकर, फटक रहे हों सूप।।   बूढ़े बरगद के तले, बुद्ध रहे हैं सोच। वर्तमान परिवेश के ...
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अवनीश त्रिपाठी
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