काव्य-शिल्पी

साहित्य एक विशद अनुभूति है और वह अनुभूति मानव मन में बसी है.....आइए महसूस करें उस अनुभूति को....😊

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मंगलवार, 22 जून 2021

ग़ज़ल by सोनरूपा विशाल

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ये कहने से ज़्यादा रहा कुछ नहीं है, नया दिन है लेकिन नया कुछ नहीं है. है घर में घुटन एक अंधे कुएँ सी, तो बाहर धुआँ है हवा कुछ नहीं है. यही बा...
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अवनीश त्रिपाठी
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